प्रेम शंकर 

अंता (मातृभूमि न्यूज़)। अंतराष्ट्रीय बाल श्रमिक निषेध दिवस के अवसर पर तालुका विधि सेवा समिति के अध्यक्ष एवं सिविल न्यायधीश सिद्धांत शर्मा के आदेशानुसार नव निर्मित गोशाला स्थल पर एक शिविर का आयोजन किया गया जिसमे प्रेमलता खत्री ने इसको मनाने का उद्देश्य बताया। बाल श्रम के लिए सर्वप्रथम माता पीता ही जिम्मेदार होते है।

18 वर्ष से कम आयु के बालक श्रमिक कहलाते है। बाल श्रम बालको के शारीरिक एवं मानसिक विकास के घातक होते है बालको को अनिवार्य रूप से प्राथमिक शिक्षा दिलाना आवश्यक है उसके बाद आगे की शिक्षा जीवन को सफल बनाने मे सहायक है। यह देश की उन्नति के लिए बाधक है 14 वर्ष से कम आयु के बालको से मजदूरी कराने पर सजा का प्रावधान दिया गया है। शिविर के दौरान अधिवक्ता पुरषोत्तम बिसारती,अधिवक्ता दिनेश मेघवाल,अधिवक्ता हरीश शर्मा सहित अन्य महिला श्रमिक भी मौजूद रही।

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